MP में जहरीले पेयजल पर NGT का सख्त प्रहार, IIT इंदौर और CPCB करेंगे जाँच
सभी कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को तत्काल अनुपालन के निर्देश, 6 सदस्यों की कमिटी गठित

Bhopal : मध्यप्रदेश के शहरों में सीवेज से मिले दूषित पेयजल की आपूर्ति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने इस गंभीर मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन करार देते हुए उच्चस्तरीय संयुक्त समिति के गठन के आदेश दिए।
एनजीटी ने आईआईटी इंदौर और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए छह सदस्यीय समिति बनाई है, जो राज्य में पेयजल प्रदूषण की जमीनी स्तर पर जाँच करेगी। समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता कमल कुमार राठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने दलील दी कि शहरी क्षेत्रों, विशेषकर भोपाल में, सीवेज लाइनों के रिसाव के कारण पेयजल पाइपलाइनें दूषित हो रही हैं। कई जल स्रोतों में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच चुका है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच जीवन के मूल अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। एनजीटी ने राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी शहरी निकायों को व्यापक और तत्काल कदम उठाने के निर्देश भी जारी किए।
इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च 2026 को होगी, जिसमें संयुक्त समिति की रिपोर्ट और अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
संयुक्त समिति में शामिल सदस्य
1. निदेशक, आईआईटी इंदौर द्वारा नामित विशेषज्ञ
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भोपाल का प्रतिनिधि
3. प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग, मध्यप्रदेश
4. प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
5. जल संसाधन विभाग का प्रतिनिधि
6. मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) – नोडल एजेंसी
कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को आदेश
एनजीटी ने अपने आदेश की प्रति प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
NGT के प्रमुख निर्देश
- जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायतों के लिए 24×7 वॉटर MIS और मोबाइल ऐप शुरू किया जाए
- जल आपूर्ति और सीवेज पाइपलाइनों की GIS मैपिंग पूरी की जाए
- नियमित क्लोरीनेशन, एरेशन और टैंकों की सफाई सुनिश्चित की जाए
- लीकेज वाली पाइपलाइनों की मरम्मत और जल स्रोतों के आसपास से अतिक्रमण हटाया जाए
- गर्मियों में निर्माण कार्यों पर नियंत्रण और जल आपूर्ति का युक्तिकरण किया जाए
- कुओं और बावड़ियों का पुनर्जीवन तथा वर्षा जल संचयन को सख्ती से लागू किया जाए
- चार माह के भीतर बड़े डेयरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए
- पेयजल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
- सार्वभौमिक जल मीटरिंग लागू कर आपातकालीन टैंकर आपूर्ति योजना तैयार की जाए



